१०९. फ़रियाद * A pinch of star
फ़रियाद बहाने ढूंढ़ता हूं, मैं तुम्हें भुलाने की, कोई मौका नहीं छोड़ता, तेरी यादें मुझे रुलाने की... इतना करीब आकर भी, मैं तुम्हें अपना बना नहीं सका, जिसकी हर सांस मुझ पर कुर्बान थी, उसे ही दिल का दर्द दिखा नहीं सका... कठिन डगर पर भी, जिसने मुझे होंसला दिया था, फूलों का सेज त्यागकर, कांटों का डगर सहर्ष स्वीकार किया था... तेरे ही खुशियों की खातिर, मैं वो गलियां छोड़ आया हूं, इन यादों को बोलो मुझे बख्स दे, जिंदा लाश हूं, रूह छोड़ आया हूं...