Posts

Showing posts from June, 2019

१०८. तेरा साथ * (काव्यंजली)

Image
तेरा साथ ✍ बिपिन कुमार चौधरी दुनियाँ के इस मेला में, प्रिय तेरे बिन अकेला मैं, तुम्हारे मुस्कान की तलाश कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... तेरे नयनों के इस नीड़ में, विचलित मेरा मन गंभीर मैं, सुकून के उन लम्हों का तलाश कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... तम से घिरे साग़र में, बहुत ख़ुश हूँ तुझे पाकर मैं, तेरी खुशियों के लिये विलाप कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... आमवश्या की विलुप्त निशाकर में, नई उषा की बेला औऱ दिवाकर मैं, शशि की भाँति ओझल होने का स्वांग कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ ....

११४. लापता तब्बसुम *

लापता तब्बसुम ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी सुना है आजकल कोई बहुत गुमसुम है, किसी के नजरों से गिड़ कर होठों से ग़ायब तब्बसुम है, इसी तब्बसुम की ख़ातिर किसी  का दिल धड़कता था, किसी के जिंदगी में तूफ़ान लाकर आजकल कोई गुमसुम है ... अख़बार में क्या ख़ूब ख़बर छपी है, अफ़साना जगजाहिर हक्कीकत दबी है, फ़िर भी उसकी गलियों में किस बात की धूम है, किसी के जिंदगी में तूफ़ान लाकर आजकल कोई गुमसुम है ... तुझे तेरे हीं आंखो के अश्कों की कसम है, मत छिपा जां से भी ज्यादा चाहने वाला तेरा एक सनम है, तेरा मोहब्बत तेरी वफ़ा से मरहूम है, किसी की जिंदगी में तूफ़ान लाकर आजकल कोई गुमसुम है... तेरी परछाईं भी तुझसे चीख़-चीख़ कर कह रही है, मेरे जैसा तुझे चाहने वाला इस जहाँ में कोई नहीं है, प्यार के जन्नत से प्यारा किसी को जहन्नुम है, किसी की जिंदगी में तूफ़ान लाकर आजकल कोई गुमसुम है ... अपने  लबों को इतना तकलीफ़ क्यों देती हो, तेरा दिल कुछ और चाहे, जुबां से कुछ और कहती हो, आख़िर किन मजबूरियों ने किया लापता तेरा तबस्सुम है, किसी की जिंदगी में तूफ़ान लाकर आजकल कोई गुमसुम है ....

११५. शर्त ए मोहब्बत *

शर्त ए मोहब्बत ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी तुम्हें मुझसे मोहब्बत है, मैं भी तेरी मोहब्बत से अनजान नहीं, बेशक तेरी मोहब्बत की गिरफ्त में हूँ, तेरी शर्तों का कोई गुलाम नहीं... दिल की गहराई में कभी उतर कर देखो, इश्क़ के पावन दिये मैंने भी जलाये हैं, मेरी मजबूरियों की यह इंतहा है, अपनी इश्क़ तेरे तोहमत की आग में जलाये हैं... शर्तों की गलियों में प्यार नहीं होता है, इश्क़ की वादियों में व्यापार नहीं होता है, तोहमत की दरिया बीच इश्क़ का इजहार नहीं होता है, हमें समंदर में गोता लगाने की जिद्द है, झीलों में ऐसा बहार नहीं होता है, शर्तों की दुनियाँ से कभी बाहर आओ, मोहब्बत की दुनियाँ से खुशनुमा संसार नहीं होता है.... रास्ते कठिन है, नामुमकिन नहीं, शर्तों की ग़ुलामी को कोई मजबूर करे, ऐसी मेरी कोई ग़लती नहीं, ऐसा मैं कोई मुजरिम नहीं, बेशक सुधा की तलाश मुझे है, कोई प्यासा नहीं रहे, जहाँ में ऐसा मुमकिन नहीं ....

११०. इश्क़ ए बेवफ़ा *

इश्क़ ए बेवफ़ा ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी किसी की चाहत में मैं दुनियाँ को भूल गया, इसी दुनियाँ के लिये कोई मुझको भूल गया, तुझे याद करने की मुझे मिल रही सजा, तेरे गुनाहों का महल तेरी ही बेवफ़ाई से धूल गया ... किसी की चाहत में मैं दुनियाँ को भूल गया ... तेरी रुसवाइयों का मुझे बहुत ग़म है, एक बेवफ़ा से मोहब्बत की सजा कम है, परछाईं मानकर एतबार किया जिसपर ख़ुद से ज्यादा, सतरंगी दुनियाँ की छटा में मैंने उसे बहुत दूर पाया, तेरी गुनाहों का महल तेरी बेवफ़ाई से धूल गया, किसी की चाहत में मैं दुनियाँ को भूल गया ... इन ख़ूबसूरत आखों के अश्कों की मोतियों को संभालो, मेरी ग़लती बता दो फ़िर चाहे मुझे दिल से निकालो, तेरी इन हरकतों से मेरा दिल टूट गया, तेरे ही लबों के तब्बसुम की ख़ातिर मेरा जिंदगी लूट गया, तेरे गुनाहों का महल तेरी एक बेवफ़ाई से धूल गया, किसी की चाहत में मैं दुनियाँ को भूल गया ... अपने ख़ूबसूरत चेहरे को यूं मत छिपाओ, जिसके लिये कभी सजती थी,उसी से यूं नजरें नहीं चुराओ, तेरे ख्यालों में आज भी यह दिल तन्हा है, आख़िर क्या गलती मुझसे हुई यह भी बताओ, तेरे गुनाहों का महल तेरी एक ब...