Posts

Showing posts from July, 2019

१०६. आख़री चाहत *

Image
आख़री चाहत... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी तुने सिर्फ़ मुझको खोया है,  मैंने ख़ुद को भी खोया है,  बेवफ़ा बोल कर तुम ख़ुश हो,  इसलिए आंसुओं को छिपा कर मेरा दिल रोया है ... मैं एक बंजारे की तरह जी लूंगा,  गमों का जाम भी हंस कर पी लूंगा,  तेरी यादों की जन्नत भी इतनी खुशनुमा है,  इसी जन्नत में भटक कर तन्हा भी जी लूंगा ... सुनहरे सपने दिखाने की रब की आदत है,  इसलिए मुझे उनसे भी बहुत शिक़ायत है,  मेरा माखौल उड़ा कर अपनी दुनियाँ में ख़ुश रहना,  अपने रब से यही मेरी आख़री चाहत है ...

११३. बेवकूफ समझदारी *

बेवकूफ समझदारी ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी यादों के झरोखों से एक धुंधला चेहरा नजर आता है, अपनी नम आँखो को छिपाकर एक चेहरा मुस्कुराता है, सजा दोनों भुगत रहे हैं आख़िर कैसा यह समझौता है, ग़लती किसकी थी यह समझ नहीं आता है, यादों के झरोखे में भी आंसुओं को तेरा मुस्कुराहट छिपाता है, तेरी यही अदा मुझे बहुत रूलाता है, मेरे दर्द को मेरा लफ्ज भी अब बयां नहीं कर पाता है, ग़लती किसकी थी यह समझ नहीं आता है ... अगर तुम्हें मुझसे बेइंतहा प्यार था, मुझे भी कहाँ तेरे प्यार की गुलामी से इनकार था, थोड़े मतलबी हो जाते दोनों फ़िर खुशनुमा अपना भी संसार था, जिंदगी के कठोर खाई के पार अपना जीवन भी गुलजा़र था... अपने दर्द को छिपा कर तुने अगर मेरा हौंसला बढ़ाया नहीं होता, दूसरों की खुशियों के लिये तुझे मैंने ठुकराया नहीं होता, अपनी बेवकूफ समझदारी का क्या ख़ूब सजा पाया है, तेरी नम आँखो ने कई-कई  बार रूलाया है ...