१०५. हैरानी * The love that hurts

#हैरानी There jaisa Yaar kahan

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

खुशियों की तलाश में, अतृप्त प्यास में,
मैं भटकता रहा यहां से वहां,
बाहें फैला कर जब उसने स्वागत किया,
अपनी खुशियों के लिए बन गया मैं बेवफ़ा...

अपनेपन का एहसास,
लफ़्ज़ों की अनकही दास्तां,
जिन गलियों में बाहर थी मेरी,
मैं भूल गया वही रास्ता...

भूल कर अब वही रास्ता खोजता हूं,
खो कर कोहिनूर हीरा ढूंढ़ता हूं,
मिलने को सब कुछ मिल सकता है यहां,
मेरी मूर्खता से हैरान मेरी किस्मत मेरा ख़ुदा...

Comments

Popular posts from this blog

१०८. तेरा साथ * (काव्यंजली)