१०७. काफ़िर * (There Jaisa Yaar kahan)

काफ़िर

कितना अधीर हूं मैं,
कितना मजबूर हूं मैं,
ताकत मेरी बढ़ती जा रही है,
फिर भी कितना कमजोर हूं मैं...

दिल के इतने करीब हो,
फिर भी कितना दूर हूं मैं,
पैसों की खाई ने किया दूर,
पैसा पाकर आज फ़कीर हूं मैं...

सल्तनत बेशक बचा लिया मैंने,
खोकर रानी ऐसा वज़ीर हूं मैं,
जिस प्यार ने मुझे ताक़त दिया,
उसी को धोखा देने वाला काफ़िर हूं मैं,

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