१०३. ख्वाहिश *

ख्वाहिश

✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी

चांद तारे तोड़ ला नहीं पाऊंगा,
बेशक यह मेरी ओकाद नहीं है, 
जिंदगी के सफ़र में साथ निभाऊंगा,
जब तलक मेरे सांसों में सांस है,

ग़रीबी का मारा लेकिन दिल का अमीर हूं,
मेरे दिल की रानी हो, भले तेरा फुटा तकदीर हूं,
चुनौतियों से लड़ना मेरी नियति है,
तेरे खातिर हर चुनौती में फतेह करने वाला वीर हूं,

तेरे खातिर ताजमहल बना सकूं, 
ऐसा बादशाह नहीं हूं मैं,
तेरे यादों में पहाड़ का भी सीना चीर दूं,
बस ऐसा दशरथ मांझी हूं मैं,

ऐ रब तुझसे मेरी इतनी ख्वाहिश,
मेरे होंसले को यूं ही बनाए रखना,
इम्तिहान जितना कठिन लेना हो ले ले,
हम दोनों की जोड़ी सजाए रखना...

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