उच्छ्वास

उच्छ्वास
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गंगा का बहता पानी,
दो दिलों की नादानी,
एक दूजे से आनंदित,
एक राजा और एक रानी,

वादों की लग रही थी झड़ी,
आसमां की आंखे थी भरी,
समर्पण का अथाह भाव था, 
फरिश्ता के बाहों में थी परी,

पेड़ पोधे, फूल पत्तियां,
नाच रहे भोरें व तितलियां,
मानो गूंज रहा हो शहनाई,
भावविभोर थी राजन संग रागी,

डगर बहुत कठिन था,
विरह में मौत मुमकिन था,
मां गंगा भी चिंतित थी,
कैसे मिलेंगे प्राची से प्रतीची,

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