प्रवीण Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 15, 2020 हम करते रहे वफ़ा,वो मन ही मन रहे खफा,दर्द का हम ढूंढते रहे दवा,उनका बढ़ता गया जफा,हमारे त्याग की हुई तौहीन,समस्या आती रही नवीन,होती रही परीक्षा कठिन,धीरे धीरे होता रहा मैं प्रवीण ... Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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