तेरा साथ ✍ बिपिन कुमार चौधरी दुनियाँ के इस मेला में, प्रिय तेरे बिन अकेला मैं, तुम्हारे मुस्कान की तलाश कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... तेरे नयनों के इस नीड़ में, विचलित मेरा मन गंभीर मैं, सुकून के उन लम्हों का तलाश कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... तम से घिरे साग़र में, बहुत ख़ुश हूँ तुझे पाकर मैं, तेरी खुशियों के लिये विलाप कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... आमवश्या की विलुप्त निशाकर में, नई उषा की बेला औऱ दिवाकर मैं, शशि की भाँति ओझल होने का स्वांग कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ ....
राह ए वफ़ा उसकी आंखे थी नम, छिपा रही थी गम, इसी अदा का मैं मुरीद, मेरी जिंदगी मेरा नज़्म, हमारे इश्क़ की चढ़ान, हो रहे थे दोनों बदनाम, रुसवाई से जिंदगी तल्ख, छिपा रही थी उसकी मुस्कान, लाख कोशिश की मैंने, छिपा न सका तूफान, उसकी शरारती आंखे, मेरी कई जिंदगी कुर्बान, साथ निभाना था मुश्किल, जान देना था आसान, एक दूजे की खुशियों की खातिर, सदा के लिए दोनों बन गए अनजान...
मिलता है सुकून सिर्फ तेरी यादों में... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी कुछ अपनों की तलाश में, खोए हुए सपनों की तलाश में, अतीत के सुनहरे इतिहास में, दिल को छूने वाली जज्बात में, बैचेन यह दिल ना जाने किस प्यास में, मिलता है सुकून सिर्फ तेरी यादों में... भविष्य के अनसुलझे सवालों में, जीवन के वीभत्स ख्यालों में, धोखा पाए रिश्तों के जालों में, पागल मेरा मन असहज़ हालातों में, खोजता वह सुकून जो तेरी मीठी बातों में, मिलता है सुकून सिर्फ तेरी यादों में...
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