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१०५. हैरानी * The love that hurts

#हैरानी There jaisa Yaar kahan ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी खुशियों की तलाश में, अतृप्त प्यास में, मैं भटकता रहा यहां से वहां, बाहें फैला कर जब उसने स्वागत किया, अपनी खुशियों के लिए बन गया मैं बेवफ़ा... अपनेपन का एहसास, लफ़्ज़ों की अनकही दास्तां, जिन गलियों में बाहर थी मेरी, मैं भूल गया वही रास्ता... भूल कर अब वही रास्ता खोजता हूं, खो कर कोहिनूर हीरा ढूंढ़ता हूं, मिलने को सब कुछ मिल सकता है यहां, मेरी मूर्खता से हैरान मेरी किस्मत मेरा ख़ुदा...

१०४. मिलता है सुकून सिर्फ तेरी यादों में... * (A day in your dream world)

मिलता है सुकून सिर्फ तेरी यादों में... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी कुछ अपनों की तलाश में, खोए हुए सपनों की तलाश में, अतीत के सुनहरे इतिहास में, दिल को छूने वाली जज्बात में, बैचेन यह दिल ना जाने किस प्यास में, मिलता है सुकून सिर्फ तेरी यादों में... भविष्य के अनसुलझे सवालों में, जीवन के वीभत्स ख्यालों में, धोखा पाए रिश्तों के जालों में, पागल मेरा मन असहज़ हालातों में, खोजता वह सुकून जो तेरी मीठी बातों में, मिलता है सुकून सिर्फ तेरी यादों में...

१११. यूं आंखो को छलकाया न करो... *

यूं आंखो को छलकाया न करो... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी आंखें खोल कर मैं ले रहा था अंगड़ाई, सपनों में तेरे यादों की बारात थी आई, इल्ज़ामों की तूने क्या झड़ी थी लगाई, तेरे इल्ज़ामों का सिला मुझे मिली तनहाई... मेरी क़िस्मत में शायद तेरा साथ नहीं था, तुझे अपना बना सकूं वो हालात नहीं था, पूरी लाइब्रेरी दिलोजान से मैं झक माड़ता रहा, मेरी उलझनों को सुलझा दे वो किताब नहीं था... सपनों में आकर उलझनें बढ़ाया न करो, गिरेबान में हाथ डाल नजरें मिलाया न करो, मेरी हसरतों को वक्त ने कब्र में दफन कर डाला है, इजहारे इल्ज़ाम से मेरी वफ़ा को शरमाया न करो... तेरी नज़रों में अगर मैं गुनाहगार हूं, सजा मुक्कद्दर ने मुक्कमल दिया है मुझे, अपनी सतरंगी दुनियां में मुझे बुलाया न करो, मेरे सपनों में आकर यूं आंखो को छलकाया न करो...

११२. मेरा कोहिनूर *

बातें साथ निभाने की थी, वक्त को आजमाने की थी, एक दूजे का हौंसला बढ़ाने की थी, रूठी क़िस्मत को मनाने की थी... फ़िर ना जाने क्यों हम मजबूर हुए, आँखो से ओझल, जिंदगी से दूर हुए, अब यह दूरी बहुत तड़पाने लगी है, तेरे बिन हर खुशियां चिढ़ाने लगी हैं... खुशियों की लुका छिपी नई बात नहीं है, तेरी याद न आई ऐसा दिन-रात नहीं है, लोगों का आना-जाना लगा हीं रहता है, दिल को सुकून दे, ऐसी कोई मुलाकात नहीं है ... अल्हड़ थी फ़िर भी तुम्हें सबकी परवाह थी, डूबती कश्ती पर सवार होकर भी लापरवाह थी, तेरी प्रेरणा ने जीवन में दीपक जलाया था, तेरी यादों ने कितना पागल बनाया था ... मेरी ख़ामोशी को भी पढ़ना आता था, मुस्कुराहट वाली कहानी गढ़ना आता था, रिश्तों को जोड़कर ऊंचाई चढ़ना आता था, तेरे संग जीना और मरना चाहता था ... अब ख़ुश होगी, मैंने तुम्हें तो छोड़ दिया है, मुस्कुराहट ने मेरा साथ छोड़ दिया है, वक्त ने न जाने क्यों मुझे इतना मजबूर किया है, हीरा में उलझा कर मुझसे मेरा कोहिनूर दूर किया है ...

१०६. आख़री चाहत *

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आख़री चाहत... ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी तुने सिर्फ़ मुझको खोया है,  मैंने ख़ुद को भी खोया है,  बेवफ़ा बोल कर तुम ख़ुश हो,  इसलिए आंसुओं को छिपा कर मेरा दिल रोया है ... मैं एक बंजारे की तरह जी लूंगा,  गमों का जाम भी हंस कर पी लूंगा,  तेरी यादों की जन्नत भी इतनी खुशनुमा है,  इसी जन्नत में भटक कर तन्हा भी जी लूंगा ... सुनहरे सपने दिखाने की रब की आदत है,  इसलिए मुझे उनसे भी बहुत शिक़ायत है,  मेरा माखौल उड़ा कर अपनी दुनियाँ में ख़ुश रहना,  अपने रब से यही मेरी आख़री चाहत है ...

११३. बेवकूफ समझदारी *

बेवकूफ समझदारी ✍🏻 बिपिन कुमार चौधरी यादों के झरोखों से एक धुंधला चेहरा नजर आता है, अपनी नम आँखो को छिपाकर एक चेहरा मुस्कुराता है, सजा दोनों भुगत रहे हैं आख़िर कैसा यह समझौता है, ग़लती किसकी थी यह समझ नहीं आता है, यादों के झरोखे में भी आंसुओं को तेरा मुस्कुराहट छिपाता है, तेरी यही अदा मुझे बहुत रूलाता है, मेरे दर्द को मेरा लफ्ज भी अब बयां नहीं कर पाता है, ग़लती किसकी थी यह समझ नहीं आता है ... अगर तुम्हें मुझसे बेइंतहा प्यार था, मुझे भी कहाँ तेरे प्यार की गुलामी से इनकार था, थोड़े मतलबी हो जाते दोनों फ़िर खुशनुमा अपना भी संसार था, जिंदगी के कठोर खाई के पार अपना जीवन भी गुलजा़र था... अपने दर्द को छिपा कर तुने अगर मेरा हौंसला बढ़ाया नहीं होता, दूसरों की खुशियों के लिये तुझे मैंने ठुकराया नहीं होता, अपनी बेवकूफ समझदारी का क्या ख़ूब सजा पाया है, तेरी नम आँखो ने कई-कई  बार रूलाया है ...

१०८. तेरा साथ * (काव्यंजली)

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तेरा साथ ✍ बिपिन कुमार चौधरी दुनियाँ के इस मेला में, प्रिय तेरे बिन अकेला मैं, तुम्हारे मुस्कान की तलाश कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... तेरे नयनों के इस नीड़ में, विचलित मेरा मन गंभीर मैं, सुकून के उन लम्हों का तलाश कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... तम से घिरे साग़र में, बहुत ख़ुश हूँ तुझे पाकर मैं, तेरी खुशियों के लिये विलाप कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ .... आमवश्या की विलुप्त निशाकर में, नई उषा की बेला औऱ दिवाकर मैं, शशि की भाँति ओझल होने का स्वांग कर रहा हूँ, रब से तेरे हीं साथ का मांग कर रहा हूँ ....